चोर का गुरु Story in Hindi

यह Article Parul Agrawal जी ने भेजा है आप उनकी वेबसाइट http://hindimind.in  में उनके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

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एक बहुत अद्भूत आदमी था। वह का गुरु था। सच तो यह हैं कि चोरों के अतिरिक्त और किसी का कोई गुरु teacher होता ही नहीं। चोरी सीखने के लिए गुरु की बडी importance है। तो जहां-जहां चोरी, वहां-वहां गुरु। जहां-जहां गुरु, वहां-वहां चोरी। तो वह चोरों का गुरु था, The Master of thieves था। उस जैसा कुशल कोई चोर नहीं था। कुशलता थी।

चोर का गुरु Story in Hindi

वह तो एक technical theft था, एक शिल्प था। जब बूढा हो गया तो उसके लडके ने कहा कि मुझे भी सिखा दें। उसके गुरु ने कहा, यह बडी कठिन बात है।
पिता ने चोरी करनी बंद कर दी थी। उसने कहा- यह बहुत कठिन बात है, फिर मैंने चोरी करनी बंद कर दी। क्योंकि चोरी में कुछ ऐसे incidents घटे कि जिनके वजह से मैं ही बदल गया।

कुछ ऐसे जोखिम आये कि उन जोखिमों में, मैं इतना जाग गया कि जागने की वजह से चोरी मुश्किल हो गई। और जागने की वजह से उस संपत्ति का खयाल आ गया जो सोने के कारण दिखाई नहीं पडती थी। अब मैं एक दूसरी ही चोरी में लग गया हूं । अब मैं परमात्मा की चोरी कर रहा हूं। पहले मैं आदमीयोें की चोरी करता रहा, लेकिन मैं तुम्हें कोशिश करूंगा, शायद तुम्हें भी यह हो जाये। चाहता तो यही हूं कि तुम आदमीयों के चोर मत बनो, परमात्मा के ही चोर बनो। लेकिन शुरूआत आदमीयों की चोरी से कर देने में भी कोई दिक्कत नहीं।

ऐसे तो हर आदमी ही, आदमी ही की चोरी से शुरूआत करता है। हर आदमी के हाथ दूसरे आदमी जेब में पडे होते है। जमीन पर दो ही तरह के चोर हैं- आदमीयों से चुरा लेने वाले, और परमात्मा से चुरा लेने वाले।

परमात्मा से चुरा लेने वाले तो बहुत कम है जिनके हाथ परमात्मा की जेब में चले जाए लेकिन आदमीयों के तो हाथ में सारे लोग एक-दूसरें की जेब में डाले ही रहते है। और खुद के दोनेा हाथ दूसरें की जेब में डाल देते है। तो दुसरे के तो उनकी जेब में हाथ डालने की सुविधा हो जाती है। स्वाभाविक हैं कि अपनी जेब की रक्षा करें तो दूसरें की जेब से निकाल नहीं सकते। दूसरें की जेब से निकालें तो अपनी जेब असुरक्षित छुट जाती है। फिर उसमें से दूसरें निकालते है।
एक mutual, एक पारस्परिक चोरी सारी दुनिया में चल रही है।
उसने कहा कि लेकिन कभी तुम परमात्मा के चोर बन सको। तुम्हें मैं ले चलूंगा। दूसरें वह अपने युवा लडके को लेकर राजमहल में चोरी के लिए गया। उसने जाकर आहिस्ता से दिवाल की ईंटें सरकाई, लडका थर-थर कांप रहा है, खडा हुआ आधी रात है, राजमहल है, संतरी द्वारों पर खडे है। और वह इतनी शांति र्से इंटे निकाल कर रख रहा है जैसे कि अपना घर हो।

लडका थर-थर कांप रहा है लेकिन बूढे बाप के बूढे हाथ बडे कुशल हैं, उसने आहिस्ता से ईंटे निकाल कर रख दी। उसने लडके से कहा- कंपो मत। साहूकारों को कंपना शोभा देता है चोरों को नहीं। ऐसे काम नहीं चल सकेगा। अगर कांपोगे तो क्या चोरी करोगे ? कंपन बंद करो। देखों मेरे बूढे हाथ भी नहीं कापंते ।

सेंध लगाकर बूढा बाप भीतर गया। उसके पीछे उसने अपने लडके को भी बुलाया, वे महल के अंदर पहूंच गये। उसने कईं ताले खोले और महल के बीच के कक्ष में वे पहूंच गये। कक्ष में एक बहुत बडी बहुमूल्य कपडों की आलमारी थी, आलमारी को बूढे ने खोला और लडके से कहा- भीतर घुस जाओं और जो भी कीमती कपडे हे बाहर निकाल लो।

लडका भीतर गया, बूढे बाप ने दरवाजा ताले से बंद कर दिया। जोर से सामान पटका और चिल्लाया- चोर। और सेंध से निकलकर घर से बाहर हो गया। सारा महल जग गया। और लडके के प्राण आप सोच सकते हैं किस स्थिति में नहीं पहूंच गये होंगे। यह कल्पना भी न की थी कि यह बाप ऐसा दुष्ट हो सकता है।

लेकिन सीखाते समय सभी मां-बाप को शायद दुष्ट होना पडता है। लेकिन एक बात हो गई ताला बंद कर गया हैं बाप, कोई उपाय नही छोड गया बचने का। चिल्ला गया हैं महल के संतरी जाग गये। नौकर-चाकर जाग गये, प्रकाश जल गये हैं, लालटेन घुमने लगी है, चोर की खोज हो रही है, चोर जरूर मकान के भीतर है। दरवाजे खूले पडे हैं, दीवाल में छेद है। फिर एक नौकरानी मोमबत्ती लिये उसे कमरे में भी आ गई हैं जहां वह बंद है।

अगर वे लोग न भी देख पाये तो फर्क नहीं पडता क्योंकि वह बंद हैं और निकल नही सकता , दरवाजे पर ताला है। बाहर लेकिन कुछ हुआ।

अगर आप उस जगह होते तो क्या होता ? आज रात सोते वक्त जरा खयाल करना कि उस लडके की जगह अगर मैं होता तो क्या होता ? क्या उस वक्त आप विचार कर सकते थे ? विचार करने की कोई गुंजाईश ही नहीं थी।
उस वक्त आप क्या सोचते ? सोचने को कोई मौंका नहीं था
उस वक्त आप क्या करते ? कुछ भी करने का उपाय नहीं था

दरवाज़ा बंद है बाहर ताला लगा हुआ हैं सतंरी अंदर घुस आये हैं, नौकर भीतर खडे हैं, घर-घर में खोजबीन की जा रही हैं, आप क्या करते ? उस लडके के पास करने को कुछ भी नहीं था, कुछ न करने के कारण वह बिल्कुल शांत हो गया। उस लडके के पास सोचने को कुछ नहीं था। सोचने की कोई जगह नहीं थी, गुंजाईश नहीं थी, सो जाने का मोैका नहीं था .

क्योकि खतरा बहुत बडा था। जिंदगी मुश्किल में थी वह बिल्कुल Alert था। ऐसी Alertness, ऐसी Awareness, ऐसी सावधानी उसने जीवन में कभी नहीं देखी थी। ऐसे खतरे को ही नहीं देखा था। और उस सावधानी में कुछ होना शुरू हुआ। उस awareness के कारण कुछ होना शुरू हुआ, जो वह नहीं कर रहा था, लेकिन हुआ।

तभी उसने कुछ अपने नाखून से दरवाजा खरोंचा, नौकरानी पास से निकल रही थी , उसने सोचा शायद चूहा या कोई बिल्ली अलमारी में अंदर है। उसने ताला खोला ,मोमबत्ती लेकर भीतर झांका उस युवक ने मोमबत्ती बुझा दी। बुझाई यह कहना केवल भाषा की बात है। मोमबत्ती बुझा दी गई क्योंकि युवक ने सोचा नही था कि मैं मोमबत्ती बुझा दूं। मोमबत्ती दिखाई पडी युवक शांत खडा था, सचेतता से मोमबत्ती बुझा दी, नौकरानी को धक्का दिया अंधेरा था, भागा।

नौकर उसके पीछे भागे, दीवाल से बाहर निकला, जितनी ताकत से भाग सकता था, भाग रहा था। भाग रहा था कहना, क्योंकि भागने का कोइ उपक्रम, कोई चेष्टा, कोई effort वह नहीं कर रहा था। बस पा रहा था कि मैं भाग रहा हूं। और पीछे लोग लगे हुए थे, वह एक कुए के पास पहूंचा उसने एक पत्थर को उठाकर कुए में पटका, नौकरों ने कुए को घेर लिया वह समझे कि चोर कूए में कुद गया है। और वह एक पेड़ के पीछे खडा था फिर आहिस्ता से अपने घर पहूंचा।

जाकर देखा उसका पिता blanket ओढे सो रहा था। उसने blanket झटके से खोला और कहा- आप यहां सो रहे हैं, मूझें मुश्किल में फंसाकर, उसने कहा- अब बात मत करो तुम आ गए। बात खत्म हो गई। कैसे आये तुम खुद हीे सोच लेना। कैसे आये तुम ? उसने कहा- मुझे पता नही कि मैं कैसे आया हूं ? लेकिन कुछ बातें घटी, मैंने जिंदगी में ऐसी जागरूकता, ऐसी Freshness, ऐसा होश देखा नहीं था। और out of that alertness उस सचेतता के भीतर से फिर कुछ शुरू हुआ, जिसको मैं नहीं कह सकता कि मेंने किया। फिर मैं आ गया हूं

उस बूढे ने कहा- अब दोबारा भीतर जाने का इरादा है ? उस युवक ने कहा- उस सचेतता में, उस awareness में जिस आंनद का experience हुआ है, अब मैं चाहता हूं मैं भी परमात्मा का चोर हो जाउं। अब आदमीयों की संपदा में मुझे भी कोई रस दिखाई नहीं पडता। क्योंकि उस सचेतता में मैंने जो संपदा देखी है, वह इस संसार में कहीं भी नहीं है। तो मैं परमात्मा का चोर होना आपको सीखाना चाहता हूं, परमात्मा करें आप भी एक Master thief सकें, एक कुशल चोर हो सके।

इस कहानी में बहुत गहरे अर्थ छुपे है .

Awareness के बारे में ओशो अधिकतर awareness, alertness के बारे में बातें किया करते है . जिनको तो हर पूरी जिंदगी जी लेते है लेकिन हम कभी present movement में नहीं होते . और हम एक आनंद से चूक जातें है . क्या है यह आनंद अगर आप भी यह जानना चाहते है तो ओशो की ध्यान विधि Dynamic Meditation करके देखे . इसे करने के बाद आप वहीँ नहीं रह जायेंगे जो आप पहले थे.

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Name : Parul Agrawal

Interest : i love to write motivational articles

Blog : i am Author on http://hindimind.in

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4 Comments

  1. gyanipandit December 7, 2015
  2. Sandeep Negi December 16, 2015
  3. Dipankar March 25, 2016
  4. shilpa k January 31, 2017

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