Humility यानी विम्रता का महत्व

Humility यानी विम्रता का महत्व

Humility ही हमें जानवरों से अलग करता है बस इस बात को ध्यान में रखे कि हमारी Humility, हमारी कायरता न समझी जाने लगे. Humility की क्या अहमियत है? ये क्यूँ आवश्यक है? आइये आज हम इसे एक Example से समझने की कोशिश करते हैं.

Humility यानी विम्रता का महत्व

Examples of Humility in Hindi

काशी में एक संत रहते थे, उनके आश्रम में कई शिष्य अध्ययन करते थे. कुछ शिष्यों की शिक्षा पूरी होने पर एक दिन संत ने उन्हें बुला कर कहा, ‘अब तुमलोगों को समाज के कठोर नियमों की पालना करते हुए ही विनम्रता से समाज की सेवा करनी होगी.’

एक शिष्य ने कहा, ‘गरुदेव हर समय विम्रता से काम नहीं चलता.’

संत समझ गए कि अभी उसमें अभिमान का अंश मौजूद है.

थोड़ी देर मौन रहने के बाद उन्हों ने कहा, ‘ज़रा मेरे मुंह के अन्दर ध्यान से देख कर बताओ कि अब कितने दांत शेष रह गए हैं?’

बारी बारी से सभी शिष्यों ने संत का मुंह देखा और एक साथ बोले, ‘आपके सभी दन्त टूट चुके हैं.’

संत ने कहा, ‘जीभ है कि नहीं?’

शिष्यों ने समझा कि गुरु जी मजाक कर रहे हैं. बोले, ‘उसे देखने की ज़रूरत ही नहीं है, जीभ अंत तक साथ रहती है.’

संत ने कहा, ‘यह अजीब बात है कि जीभ जनम से म्रत्यु तक साथ रहती है और दांत जो बाद में आते हैं, पहले ही साथ छोड़ देते हैं. जबकि उन्हें बाद में जाना चाहिए. ऐसा क्यूँ होता है?’

एक शिष्य बोला, ‘ये तो सृष्टि का नियम है.’

संत ने कहा, ‘नहीं वत्स, इसका जवाब इतना सरल भी नहीं है जितना तुम समझ रहे हो. जीभ इस लिए नहीं टूटती क्यूंकि उस में लोच है. वह विनम्र हो कर अन्दर पड़ी रहती है. उसमें किसी तरह का अहंकार नहीं है. उसमें विमार्ता से सबकुछ सहने की शक्ति है. इसलिए वह हमारा हमेशा साथ देती है. जबकि दांत बहुत कठोर होते हैं. उन्हें अपनी कठोरता पर अभिमान रहता है. वह जानते हैं कि उनके कारन ही इंसान की खूबसूरती बढ़ती है इसलिए वह निष्ठुर होते हैं. उनका यही अहंकार और कठोरता उनकी बर्बादी का कारण बनते है. इसलिए तुम्हें यदि समाज की सेवा गरिमा के साथ करनी है तो जीभ की तरह नम्र बन कर नियमों का पालन करो.’

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3 thoughts on “Humility यानी विम्रता का महत्व

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