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Information पर कितना Trust करें

आज सूचना संक्रान्ति का युग है. Information का विश्वसनीय होना आवश्यक है, क्यूंकि Information अगर विश्वसनीय न हो तो अर्थ से अनर्थ भी हो सकता है. कुछ पूर्व सूचनाएं भी होती हैं जो की अनुमान पर आधारित होती हैं. लेकिन कभी कभी सूचनाओं का Logical न होना परिस्थितिजन्य भी हो सकता है. जैसा के निचे की Story से पता चलता है:

एक बार गाँव वालों ने अपने मुखिया से पूछा कि इस साल ठंड कैसी पड़ने वाली है, ताकि उसी हिसाब से अलाव जलने के लिए लकड़ियों का Arrangements किया जाए. लेकिन वहां का मुखिया नया था, New Generation का था, शहर से पढाई कर के नया नया गाँव आया था, जिस वजह से उसे Weather / मौसम के अनुमान लगाने का पारम्परिक तरीका पता नहीं था. लेकिन चूँकि वह मुखिया था, इसीलिए उसे अपनी अज्ञानता दिखलाने में बड़ी शर्म आई. अतः उसने बिच का रास्ता निकलते हुए कह दिया कि इस बार ठंड पड़ेगी.

मुखिया की बात मन कर गाँव वालों ने लकिया इकट्ठी करना शुरू कर दिया. इधर मुखिया ने गोल मोल Answer तो दे दिया था, लेकिन कहीं बाद में बेईज्ज़ती न हो जाए इसिये Correct Information भी हासिल करना चाहता था.

उसने पास के शहर का रुख किया और वहां स्थित मौसम विभाग (Weather Department) से संपर्क कर के जाकारी हासिल करनी चाही तो वहां से Weather Department के Clerk का उत्तर आया कि ‘इस साल अच्छी ठंड पड़ने की संभावना है’

जब मुखिया ने ये बात गाँव वालों के समीप दोहराई तो वो और भी तेज़ी के साथ लकड़ियाँ इकट्ठी करने लगे. कुछ दिनों बाद मुखिया ने मौसम के पूर्वानुमान की और Confirmation कर लेनी चाही. उसने फिर से शहर जाकर मौसम विभाग से पूछा. मौसम विभाग नि बताया कि इस बार बड़ा तेज़ जादा पड़ने वाला है. मुखिया ने जब अपने समुदाय वालो को बताया तो उसकी बातों का भरोसा कर वह रात-दिन लकड़ियाँ इकट्ठी कर ने में जुट गए. वो कोई और काम नहीं करते केवल लकड़ियाँ ही इकट्ठी करते रहते.

जाड़े का मुसम अब करीब था. ज्यादा ठंड पड़ने के कोई लक्षण न थे. तो मुखिया ने एक बार फिर मौसम विभाग से जानना चाहा. इस बार उसे जवाब मिला कि अबकी तो बड़ी भयंकर ठंड पड़ने वाली है.

इस पूर्वानुमान से हैरान हो कर मुखिया ने पूछ ही लिया कि आखिर आप इतने भरोसे से कैसे कह सकते हैं, आपको ऐसा कौन सा लक्षण दिखाई पद रहा है?

Weather Department के कलार्क ने जवाब दिया: हम लगातार देख रहे हैं कि इस बार पड़ोस के गाँव में रहने वाले लोग पागलों कि तरह लकड़ियाँ जमा कर रहे हैं.

आप जिसे ज्ञानी और अक़लमंद समझ रहे होते हैं, हो सकता है वोह शायद आप ही से प्रेरणा लेकर Information का ज्ञान प्राप्त कर रहा हो. अतः आवश्यक है कि सूचना पर यकीन करने से पूर्व सूचना के Source की पड़ताल कर ली जाए.

याद रखें हर वो Information जिस पर आप यकीन करने वाले होते हैं, वह भी दरअसल किसी और पे भरोसा कर के आपको मुहैय्या किया गया होता हैं.

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