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Understanding Responsibility Hindi Stories

Understanding Responsibility Hindi Stories

सेवा एक ऐसा कार्य मन गया है जिसके लिए Time और Eligibility नहीं देखि जाती है. Responsibility पर दो Hindi Stories यहाँ आप के सामने रखता हूँ:

Responsibility का एहसास Hindi Story

Gurukul Kangri की पुरानी बात है. एक Student रोग से बहुत पीड़ित था. Gurukul की पुरानी परंपरा के अनुसार उस रोगी Student की देखभाल और nursing के लिए बारी बारी से साथी Students को Duty पर लगाया गया था. आधी रात का Time था. सब रोगी और परिचारक सो रहे थे. अचानक वह Student रोग की अत्यधिक वेदना से तड़प उठा. वह उठा और उसे तेज़ उलटी आई. उसी समय कुलभूमि का भ्रमण करते हुए Mahatma Munshiram Ji वहां आ गए. उन्हों ने अपने हाथों से उस रोगी Student की उलटी को संभाला और उसे बहार Toilet तक पहुंचा कर, हाथ साफ़ कर, लोटे में पानी लेकर रोगी को चिलमची में कुल्ली कराया. उसी समय रोगी के साथ Duty पर आए Student की नींद खुल गई. वह Mahatma Munshiram Ji को देख कर शर्मिंदा हो गया. बोला थकावट से नींद की झपकी आगई. आपने व्यर्थ का कष्ट किया. मुझे आवाज़ दे देते.

इस पर Mahatma Munshiram Ji बोले: इसमें कष्ट कैसा? रोगी की आर्त पुकार या उसकी मदद केलिए इंसान को खुद ही Responsibility निभानी होती है. इस काम के लिए किसी दुसरे को पुकारन कोई मतलब नहीं रखता.

यह महात्मा जी अगर चाहते तो Student को जगा सकते थे. लेकिन वह तो वह स्वंय जाग कर भी सोए हुए ही माने जाते. जगा हुआ वही है, जो ज़िम्मेदारी और Responsibility को प्रत्यक्ष देखने के बाद उसे पूर्ण करता है. न की दाएं बाएँ देखने का उपकर्म करता है. Medical की व्यवसाय से जुड़े लोगों को तो इस बात की Especially ध्यान रखना चाहए, क्यूंकि उसकी ज़िम्मेदारी ऐसी होती है जिसका भार किसी और को नहीं दिया जा सकता. रोगी का कष्ट देख कर भी यदि Doctor अपनी ज़िम्मेदारी का अनिभव नहीं करता तो निश्चय जानिये कि वह खुद ही बीमार है और उसे इलाज और treatment की ज़रूरत है. ज़िम्मेदारी स्वफुर्त होनी चाहए,

Responsibility Hindi Story क़दम उठाने से डरें नहीं

Australia का एक Student पैस्टोला Doctor की पढाई पढ़ रहा था. एक दिन उसे रास्ते में चलते एक बच्चा मिला. पैस्टोला ने बच्चे के Parents को ढूंढने केलिए Police में सुचना दी. उसे अनाथालय भेज दिया पैस्टोला को एक दिन का साथ से ही उस बच्चे से लगाव हो गया. वह जब भी उसे देखने जाता , उसके लिए कुछ Gifts भी साथ ले जाता. पैस्टोला ने अनाथालय में देखा कि वहां निर्वाह और education की तो भरपूर व्यवस्था है, परन्तु Staff में दयाभाव नहीं है, जिसे पाकर बच्चों का अंत:करण खिले. पैस्टोला ने पढाई completed होते ही यह movement Start कि जिनकी family छोटी है, वे अनाथ बच्चों को अपने परिवार में शामिल करने को कोशिश करें और उन्हें लाड प्यार के साथ पालें. खोजने पर उसे ऐसे उदार व्यक्ति भी मिल गए और असहाए बच्चे भी. आत्मीयता के वातावरण में बच्चों का मन Develop होने लगा. पैस्टोला ने विवाह नहीं किया. आनाथ बच्चों को अपनी अवलाद माना. परित्यक्ताएं व वृद्धाएं उसकी बहन और माँ की तरह उसके घर में रहने लगीं. अपना सारा Income वह इसी कार्य में लगा देता था. उसी Inspiration से अनेक उदारमना लोगों ने भी अपनी family में लाचार लोगों को सम्मिलित किया. पैस्टोला का आन्दोलन दूर तक फैला. उन्हें इस कार्य केलिए Nobel Prize भी मिला और उन्हों ने मिली राशि को इसी Plan में लगा दिया.

एक Simple कार्य में भी यदि ज़िम्मेदारी और Responsibility का एहसास किया जाए तो समपर्ण का साथ पाकर वह अवश्य ही Success होता है. पैस्टोला ने ज़िम्मेदारी की भावना के साथ त्याग भी किया और यही अनुकरणीय है.

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