Education

Children’s education and training

Children’s education and training, पर या Post जिसे हम अक्सर ध्यान में नहीं रखते.
बच्चों की तरबियत का दौर Parents के लिए शुरू ही से Hard रहा है. But हमारे आज के दौर के बच्चों के बिगाड़ के पीछे Parents का बच्चों को बेजा लाड प्यार और उनकी सही गलत सभी इच्छाओं को पूरा करना भी है. बच्चे चूंके Fresh और Pleasant फूटती हुई कोंपलें होते हैं इसलिए उनको जिस राह चला दिया जाए उसी पर चल पड़ते हैं. अगर उनके Emotions का ख़याल रखने के साथ साथ उनकी विचार और Behavior की Training गम्भीर विचारधारा की बुन्यादों पर न की जाए तो Society के लिए बोझ बन जाते हैं. अगर कल को उन्हें Bad Time झेल कर अज़ीम इंसान बनना है तो आज उनको आने वाले वक़्त की जटिलता से Inform करना होगा. जिन माओं ने

सपने बच्चों की Solid foundation पर तरबियत की उनको तारिख हमेशा सलाम करती रहेगी.

Children's education and training

Children’s education and training

Children’s education and training

आज Facilities और Conveniences से सुरुचिपूर्ण दौर है तो फिर भी बच्चे Educational Activity में मनचाहा Achievements (कामयाबियां) हासिल करने में Failed क्यूँ हैं? शहरों में Parents बच्चों की तालीम तरबियत (शिक्षा और प्रशिक्षण)  के लिए पैसे को पानी की तरह बहा रहे हैं मगर उन्हें मनचाहा कामयाबी क्यूँ नहीं मिल रही?
आप सेना, Civil, Judiciary, Education और दुसरे Department में झाँक कर देख लें अक्सर देहाती लोग ही क्यूँ Successful नज़र आते हैं? क्या उन्हें शहर वालों के मुकाबले ज्यादा Facilities मिलते थे? क्या वह English Midyam Schools की Fee Pay कर सकते थे? वह लोग तो उन खस्ता हाल Schools में पढ़े होते हैं जहां बिछाने को टाट भी नहीं होता. वह अपने घरों से खाद और चीनी वाले खाली झोले में Books लेजा कर पढ़ते हैं. कुछ
Backward areas में तो ग्यारह ग्यारह Schools को Control करने वाले सरकारी Masters ( Headmaster Incharge ) तक केवल Metric Pass होते हैं. फिर क्या वजह है के कामयाबी आम तौर पर देहात्यों की ही क़दम चूमती है?
उत्तर बिलकुल आसान है की उनके Nature में Hard Labor कूट कूट कर भरी होती है. वह सुबह Early Morning उठ कर अपने House और Farm के काम काज निपटा कर Breakfast करते हैं और तब कहीं जाकर School जाने की तैय्यारी करते हैं. वह सुबह आठ बजे उठ कर जूतों के तस्मे बाँध कर Air Conditioned classrooms में विराजमान नहीं होते. वह 10-12 Kilometer तक Cycle चला कर या 50-60 Kilometer तक बसों के धक्के खा कर बगैर Pocket Money के पढ़ाई करते हैं. वह शाम के वक़्त भूक से निढाल घर पहुँचते हैं जहां दर्जन भर कामों की List उनकी राह देख रही होती है. वह उन सबको निपटा कर शाम को School का Homework पूरी करते हैं. वह Hard Work के आदि होते हैं. और उनके Parents उन्हें Teachers का Respect करना सिखाते हैं. वह School में मिली हुई सजा को घर में बतलाते हुए शर्म महसूस करते हैं.
जब के यहाँ शहरों में ठीक इसका उल्टा है घर में हर तरह के Facilities होने के बावजूद बच्चे न ही पढने के आदि बनाए जाते हैं ना ही उन्हें Society में किसी को Respect देना सिखाया जाता है. Parents और Teachers इन सबके ज़िम्मेदार होते हैं. मगर Teachers को तो तो ये Chance ही नहीं दिया जाता के वह बच्चों को सभ्यता सिखा पाएं. और Parents का कहना के वह खुद बखुद नहीं मानते. अगर हमारे बच्चों में Teachers की बातों को गौर से सुन कर उसका पालन करने की जागरूकता आजाए तो वह Parents कोभी Respect देने वाले बन जाएंगे. वह Society के लिए भी बेहतरीन व्यक्ति बन सकते हैं.
सरका की Policies “मार नहीं प्यार” का Example उस Plants की तरह है जिसे योरोप के किसे ठण्ड वाले Country से निकाल कर एशिया के तपते हुए रेगिस्तान में रोप दिया जाए तो वह धूप की तीव्रता से मुरझा जाए.
हमें बच्चों को Physical punishment ( जिस्मानी सजा ) देने का हरगिज़ हरगिज़ Support नहीं करना चाहए. लेकिन उन्हें Teachers के सर पर यूँ सवार कर देना उन्ही बच्चों का Future तबाह व बर्बाद करना है. Education Specialists और Philosophers ने Physical punishment ( जिस्मानी सजा ) की रद्द ज़रूर की है लेकिन Society के लिए Cancer की तरह असर करने वाला बेजा लाड प्यार का Support भी नहीं किया. आज योरोप और America के बच्चे ( इज्तेराबी कैफिय्यात ) का शिकार होकर Drugs और दूसरी बुराईय्यों की दलदल में धंसते जारहे हैं. क्या वजह है के इतने Advanced Country अपने बच्चों को सुधार नहीं पारहे?
क्यों के उन्हों ने अपने बच्चों को Society का, कानून का, Teachers और Parents का Respect नहीं सिखलाया.

आज के Parents के लिए ज़रूरी है के वह अपने बच्चों को खिलाएं “सोने का निवाला” लेकिन उन्हें देखें शेर की आँख वरना ” यही बच्चे अपने Parents को Old House में छोड़ कर उनके तमाम लाड प्यार और भारी Fee भूल जाएँगे” और हम अफ़सोस के साथ देखते रह जाएँगे.
यह पोस्ट “Children’s education and training” Hindi Translate है जनाब अब्दुर-रज्जाक साहब के उर्दू Article का

UPTO
50%
Cash-Back
Deal
Recharge using any payment method and get a 50% cashback; The total cashback that a customer can avail during the offer period is INR 50; The Offer is applicable for both new and existing customers; Shop with Amazon Pay balance only for the eligible products and get Rs.50 cashback. (b) The cashback amount will be credited to the eligible customer's account as Amazon Pay balance There is no minimum recharge value required to be eligible for the offer More Less

About the author

Absarul Haque

एक ब्लॉगर जो अपनी बातों को अच्छी बातों में बदलना चाहता है. और आपके सहयोग के बिना ये नामुमकिन है.

Leave a Comment

2 Comments

  • अपने भविष्य कैसा होंगा ये पूरी तरह हम पर निर्भर करता हैं, हम बच्चो को कितनी भी अच्छी शिक्षा दे लेकिन उनकी भविष्य में संगती कैसी रहेंगी ये हम नही जानते,
    अच्छा आर्टिकल

  • “Children’s education and training” की यह लेख बच्चों के भविष्य के लिए काफी फ़ायदेमंद साबित होंगा.