Personal Development

How to control Anger, Tips in Hindi

गुस्सा आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.

गुस्सा एक सामान्य मानवीय भावना, Human feeling है. अगर आप को कोई धोखा दे या आप को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे या बिना किसी कारण आपकी आलोचना करे तो आपको गुस्सा आने लगता है. गुस्सा आप के ले Useful भी हो सकता है और Harmful भी. जब कोई आपको गुस्सा दिलाता है तो आपकी Emotional status आपको या तो भागने या फिर Competition करने के लिए तैयार करती है. इससे आप को शक्ति भी मिलती है और खुद का बचाव करने की हिम्मत भी. इस शक्ति और भावनात्मक प्रवाह का शरीर से गुस्से के रूप में बाहर निकलना आवश्यक है. यदि ऐसा न हो तो यह इकट्ठा होकर शरीर और मन पर Negative effect डालना Start कर देते है.

How to control Anger, गुस्सा यह आपका दोस्त है या

गुस्से को Creative तरीके से व्यक्त करना बहुत Hard होता है क्योंकि क्रोध के समय इंसान भावनाओं में बह कर उचित और अनुचित के बिच तमीज़ करना भूल जाता है और उसका गुस्सा Issues को सुलझाने के बजाय उन्हें बिगड़ने का कारण बन जाता है.

गुस्सा कब problem बन जाता है?

गुस्से का आना कोई problem की बात नहीं लेकिन इसे Negative अंदाज़ में व्यक्त करना कभी कभी परेशानी का सबब बन जाता है, Specially तब जब इससे किसी को नुकसान या किसी की भावना आहत होने का खतरा हो, Sentiments Hurt होरहा हो. क्रोध के समय सही decision लेना या सोचना समझना इसलिए भी मुश्किल हो जाता है की यह बिन बुलाए आता है और मन को कुछ देर के लिए सुन कर देता है. स्वभाव में अचानक आने वाले इस बदलाव को समझना आसान नहीं होता.

आप को किसी बात पर गुस्सा आता है, आप उसे व्यक्त करते हैं और आगे निकल जाते हैं. यह आपके Health और आप रिश्तों पर तब असर करता है जब आप इसे व्यक्त न करें या अनुचित तरीके से करें. हमारे साथ यह अक्सर होता है कि Past में हमें किस बात पर गुस्सा आया हो और हमने इसे व्यक्त न किया हो. और फिर एक दिन अचानक वह सारा गुस्सा Untimely निकल आया हो जिस पर बाद में हमें अफससोस भी हुआ हो.

यदि गुस्से को सही time पर व्यक्त न किया जाए तो इससे मनुष्य के अंदर भावनात्मक तनाव, emotional stress और क्रोध इकट्ठा होने लगता है. ऐसे लोग बात करते करते अचानक Emotional हो जाती हैं और समझने के बजाय गुस्से और चिड़चिड़ाहट का प्रदर्शित करने लगते हैं. ऐसा Behavior दूसरों और खुद उनके लिए भी हानिकारक होता है. इससे तरह के लोग Depression, नींद न आने, भूख न लगना जैसी Problems के साथ साथ हर समय चिंताओं से पीड़ित रहते हैं. उन्हें मामूली बातों पर गुस्सा आने लगता है और धीरे धीरे लोग उनसे बात करना या सलाह लेना छोड़ देते हैं. साथ ही Physical Fitness पर भी कई प्रकार के नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, जैसे पेट की खराबी, heart disease या blood pressure का बढ़ जाना.

गुस्से पर काबू कैसे पाया जाए?

successful life जीने का राज यह है कि आप अपनी भावनाओं के अधीन नहीं बल्कि भावनाएँ आप के अधीन हों. गुस्से को अपना अधीन करने से पहले उसे और उसके पीछे छिपे कारण को समझना चाहिए. गुस्सा ज्यादातर एक गहरी चोट की वजह से आता है. Past में हम ने जो जो पीड़ा सहन की होती हैं वे आगे चलकर हमारे गुस्से की वजह बन जाती हैं. गुस्सा किसी भी ऐसी स्थिति में जहां हमें दुख या चोट पहुंचने का खतरा हो हमारी पहली reaction होती है. यह हमारा उस परेशानी से बचने या उसे छिपाने का एक तरीका होता है. परेशानी को दूर करने के लिए उसे Accept करना होगा. हमें समझने की जरूरत है कि अगर हमें गुस्सा आ रहा है तो इसका मतलब है कि हमें कोई तकलीफ या कोई परेशानी जरूर है. यदि हम अपनी परेशानी को पहचानने और उसको Accept करने लगेंगे तो ऐसी स्थिति में हमारे लिए अपनी Emotions पर काबू पाना और उनका सही ढंग से व्यक्त करना Easy हो जाएगा.

क्रोध के समय महसूस होने वाली लक्षणों को पहचानने की कोशिश करें. दिल की धड़कन तेज हो जाना या शरीर का ऐंठन यह कुछ सामान्य लक्षण हैं, जो उस समय दिखाई देते हैं जब आपको गुस्सा आ रहा होता है. क्रोध के समय खुद से पूछें, “क्या मैं इतना गुस्सा हूं कि खुद पे काबू नहीं रख सकता?” अगर जवाब “हाँ” है तो अपने आप को उस जगह से हटा लें. खुली हवा में जाएं, लम्बी लम्बी सांसें लें. खुद को सामान्य करने की कोशिश. गुस्से का सकारात्मक ढंग से अभिव्यक्ति ज़रूरी है. अगर आपका अपने आप पर नियंत्रण नहीं होगा तो आप अपनी बात सही तरह दूसरे तक पहुँचा नहीं पाएंगे और आपका क्रोध अधिक बढ़ता जाएगा. जिस बात पर आपको गुस्सा है खुलकर उस बारे में बात करें. दूसरों की सलाह का सम्मान करते हुए अपने विचारों को व्यक्त करें. यदि आप दूसरों की सोच का सम्मान करेंगे तो लोग आपकी बातों को भी सुनने और समझने की कोशिश करेंगे.

अधिक गुस्सा आने का एक कारण यह भी है कि हम डर जाते हैं. हमें लगने लगता है कि अगर हम ने गुस्से का इजहार नहीं किया तो लोग हमें दबा देंगे या हमारी बात को महत्व नहीं देंगे. पहले अपने दिल से यह डर निकाल दें. अपना बचाव करने करने के चक्कर में हम अपनी राय व्यक्त नहीं कर पाते. जब किसी चर्चा के दौरान आपको गुस्सा आने लगे तो पहले तो लम्बी लम्बी सांसें लें (इससे आपके अपनी Emotions पर काबू पाना आसान हो जाएगा फिर बात करना आसान हो जाएगा) और फिर अपने गुस्से को दबाने और छिपाने के बजाय Self-confidence के साथ उसे व्यक्त करें और इसका कारण बताएं. अपनी भावनाओं को भाषा दें. जिस दिन आपको अपनी भावनाओं को सार्थक और सकारात्मक Words का रूप देना आ जाएगा उस दिन आपका क्रोध आपका दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त बन जाएगा!

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Absarul Haque

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