Short Stories with Moral

Kids Short Stories with Moral in Hindi.

Kids Short Stories with Moral in Hindi.

बहुत पुराने ज़माने की बात है खुरासान में रजा बख़्त शाह का शासन था जो बहुत नेक और दयालु रजा था। उसे दुनियाभर की सभी तरह के ऐश व आराम नसीब थे लेकिन इसके बावजूद वह सादा जीवन व्यतीत करता था। राजा बख़्त शाह के बिलकुल विपरीत उसका मंत्री दिलावर बहुत घमंडी और असभ्य था। वह एक धनि घराने से था। ऊँचे परिवार और बे पनाह दौलत ने उसका दिमाग ख़राब कर रखा था। इन सभी कमियों के बावजूद उस में एक अच्छाई थी जो उसकी तमाम कमियों पर भारी थी। वह अच्छाई यह थी कि वह बहुत बुद्धिमान और योग्य था। उसकी इसी अच्छाई के कारण बख़्त शाह उसे उसके अक्खड़ स्वभाव के बावजूद रखे हुए था।
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एक दिन की बात है बख्त शाह उसी मंत्री के साथ एक यात्रा पर निकल पड़ा। उनके साथ एक सेवक भी था। वह तीनों अपने अपने घोड़ों पर सवार थे। जब वह एक रेगिस्तान से गुज़र रहे थे तो अचानक ज़बरदस्त आंधी चली। और वह एक दूसरे से अलग हो गए। कुछ देर बाद जब आंधी रुकी तो उन्हों ने एक दूसरे को खोजना आरंभ किया। सबसे पहले सेवक को कुछ दूरी पर एक झोंपड़ी दिखाई पड़ी। जब वह वहां पहुंचा तो उसे एक अँधा फ़क़ीर दिखाई दिया। सेवक ने उस से पूछा: ऐ अंधे क्या इस तरफ से कोई सवार पार हुआ है?
(Kids Short Stories with Moral)
अंधे फ़क़ीर ने उत्तर दिया: भाई ! मुझे तो किसी की आहट सुनाई नहीं दी।
सेवक यह सुन कर आगे चल दिया। कुछ देर बाद मंत्री दिलावर खान उधर से गुज़रा। उसने देखा के एक अँधा आदमी बैठा हुक्का पि रहा है। उसने भी पूछा: ओ फ़क़ीर क्या इधर से कोई सवार गुज़रा है?
फ़क़ीर ने कहा: हाँ एक सेवक जो एक घोड़े पर सवार था कुछ देर पहले यहाँ से होकर आगे गया है।
दलावर भी अंधे फ़क़ीर का उत्तर सुन कर आगे बढ़ गया। कुछ ही समय हुआ था के संयोग से रजा बख़्त शाह भी मंत्री और सेवक को खोजते हुए उधर आ निकला। उस ने जब फ़क़ीर को देखा तो अपने घोड़े से उतर कर फ़क़ीर के पास आया और बड़े सम्मान से पूछा: शाह साहब क्या आप को मालूम है इधर से कोई सवार गुज़रा हो?
Kids Short Stories with Moral अंधे फ़क़ीर ने कहा: जी हाँ जहां पनाह! पहले तो हजूर का सेवक इधर से गुज़रा, उसके बाद मंत्री का गुज़र हुआ।
रजा बख्त शाह को यह सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ और उसने फ़क़ीर से पूछा: शाह साहब आप तो नेत्रहीन हैं भला आप को कैसे मालूम हुआ कि मैं रजा हूँ?
अंधे फ़क़ीर ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया: जहाँ पनाह! आप के सेवक ने मुझे अँधा कहा और आप के मंत्री ने मुझे फ़क़ीर कहा और जहाँ पनाह ने मुझे “शाह साहब” कह कर आवाज़ दी। बातचीत की शैली से मैं ने अंदाज़ा लगा लिया कि कौन क्या है। बख़्त शाह ने अंधे फ़क़ीर की बातों से प्रसन्न हुआ, और उसे बहुत सा पुरस्कार दे कर गया।
Kids Short Stories with Moral, महल पहुँच कर बख़्त शाह ने सेवक को फ़क़ीर से अभद्र व्यवहार दंड दिया। और मंत्री दिलावर खान को बुला कर अंधे फ़क़ीर से होने वाली बातचीत के बारे में बताया और समझाया कि आदमी को अपने से कमतर या छोटे से भी प्रसन्नता और सभ्यता से बात करनी चाहए। मंत्री अपने व्यवहार पर बहुत लज्जित हुआ। उसने भविष्य में ऐसी भूल न करने का संकल्प लिया।
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Absarul Haque

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