Personal Development Success

बगीचे और जंगल में क्या अंतर है Life Pro Tips

अपने आप से पूछें कि वह कैन सी चीज़ है जो आप के अन्दर ऐसा जुनून पैदा कर दे कि

आप समय का एह्साह तक खो बैठें,

यह जूनून आप को सुबह सवेरे बिस्तर से उठाए,

आप उस काम से इतनी अधिक मुहब्बत करते हों कि बगैर किसी Income के उसे करने के लिए Ready हों,

आप का उत्तर क्या है?

क्या आप के Life में कुछ ऐसा है जो इन तीनों Quotations के लिए “हाँ” बन पाए?

अगर हाँ… तो आप सही रास्ते पर जा रहे हैं.

लेकिन अगर नहीं… तो निचे केवल एक आसान सा Question है उसे हल कर लें, आप को ऐसा काम मिल जाएगा जो ऊपर के तीनों Questions का Answer बन्ने में सक्षम हो.

बगीचे और जंगल में क्या अंतर है Life Pro Tips

बगीचे और जंगल में क्या अंतर है?

है न रोमांचक और दिलचस्प प्रश्न?

बागीचा नियमित रूप से योजना के साथ तैयार किया जाता है, जबकी जंगल को नहीं.

बागीचे का मालिक निर्णय लेता है, फैसला करता है कि क्या उगना चाहिए और क्या नहीं, वह अपनी पसंद के बीज बोता है, जबकि जंगल में पेड़ पौदे अपने आप उगते है या फिर लोगों द्वारा फेंके हुए बीजों से.

मालिक अपने बागीचे में पानी पटाता है और उसकी देखरेख करता है उसे कीड़ों मकोड़ों से बचाता है बदलते मौसम की तेज़ी से उसकी रक्षा करता है, लेकिन जंगल के लिए परीशान होने वाला, उसकी फ़िक्र करने वाला कोई नहीं होता.

इसी तरह जब तक हम यह निर्णय नहीं लेंगे की Life को हम कैसा देखना पसंद करते हैं, और फिर अपने Life के लिए उसके अनुकूल बिज नहीं बोते, फिर उसकी देख रेख नहीं करते, पानी नहीं देते, उसे बचाते नहीं तब तक हमारे Life जंगल कि तरह अव्यवस्था और बिखराओ से ग्रस्त हो ने पर मजबूर रहेंगे.

जिसने भी कहा है बिलकुल सही कहा है कि कामयाबी का पहला क़दम ख्वाब देखने की उम्र में एक बड़ा ख्वाब देखना है.

हमारे Life का बिज दरअसल हमारे Life का उद्देश्य और जुनून है. कल्पना किजए आप अपने बागीचे में एक बिज बोते हैं, सुबह सुबह ये दिखने केलिए उठेंगे कि क्या वह ठीक ठाक है, सभी बाहरी खतरों से उसकी रक्षा करेंगे और उसके लिए भाग दौड़ करेंगे. बिलकुल उसी तरह वह ताक़त जो आपको सुबह उठाती और आधी आधी रात तक जगाए रखती है केवल आपके जूनून से ही पैदा होती है. अगर यह हमारे पास न हो तो हम किस लिए सुबह सुबह उठेंगे? और फिर देर तक जागते रहेंगे?

Life को बनाने के संबंध में एक कहानी बहुत मशहूर है कि:

एक उपजाऊ जमीन में दो बिज एक साथ पड़े थे. उन में से एक कहता था कि वह मिट्टी में अपनी जड़ों को गाड़ कर फैलाना चाहता है और फिर जब वक एक बार मजबूत हो जाएगा तो फिर अपनी कोंपलों को ऊपर धकेल देगा फिर वह सूरज, बारिश और आंधी का सामना कर सकता है. चूँकि तमाम परीक्षाओं का सामना करने के लिए वह Ready था इस लिए वह उगने में कामयाब हो गया. जबकि दूसरा बिज उगने से डरता था उसने सोचा की अपनी जड़ों को मिट्टी के निचे धकेलने से हो सकता है उसे थकान हो, और उसकी परिशानियां बढ़ जाए, और फिर मुमकिन है जब वह अपने कोंपलों को ऊपर धकेले तो वहां सूरज, बारिश और बहुत सी सखतियों का सामना न कर पाए. चुनांचे वह फैसला करता है की जब तक परिस्तिथि अनुकूल नहीं हो जाते वह इंतज़ार करेगा और नहीं उगेगा. पहला बिज एक पौदे की सूरत में उग जाता है जबकि दूसरा अनुकूल परिस्तिथियों के इंतज़ार करता रहता है. उसके इंतज़ार के दौरान ही एक पक्षी खाना ढूंढते हुए आता है और उसे खा जाता है.

हमारे Life में भी ऐसा ही होता है जो भी परिस्तिथि के अनुकूल होने के इंतज़ार में पड़ता है बिलकुल बिज ही की तरह Life उसे निगल जाती है. जबकि पहला अपने लिए स्थान और उंचाई चुन चूका होता है.

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About the author

Absarul Haque

एक ब्लॉगर जो अपनी बातों को अच्छी बातों में बदलना चाहता है. और आपके सहयोग के बिना ये नामुमकिन है.

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2 Comments

  • आपने बखूबी जंगल और बगीचे के फर्क को समझाया। आजकल मैं भी पिछले कुछ माह से घर में खाली पड़ी जमीन में छोटा सा लॉन तैयार करने में जुटा हुआ हूं। यकायक आपकी पोस्ट देखी तो पढ़ने बैठ गया। भई वाह बहुत खूब। बहुत ही अच्छा लिखा है।