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जो डर गया वो मर गया Mahatma Gandhi Story

जो डर गया वो मर गया Mahatma Gandhi Story

Mahatma Gandhi Story in Hindi

गँधीजी बहुत निर्भीक थे। इसी कारण वे सत्य के लिए कठिन-से र्किठन कष्टों को भी झेलने को तैयार हो जाते थे।

बात उस समय की है जब वे दक्षिण अफ्रीका में डर्बन की अदालत में बैरिस्ट्ी करने गये थे। वे कोर्ट में सर पर पगडी बाँधकर जाते थे। एक दिन अदालत में वे जज के सामने गये तो,जज ने Mahatma Gandhi और उनकी पगडी को बडे गौर से देखा और कहा-अदालत में पगड़ी बाँधकर आना अदालत के मर्यादा के विरूद्ध है।

जज ने Mahatma Gandhi को पगड़ी उतारने लिए कहा। लेकिन Mahatma Gandhi पगडी क्यो उतारते? यदि पगडी लगाकर आना अदालत की मर्यादा के विरूद्ध था। तो पगड़ी उतारना गाँधीजी के विरूद्ध था। अतः, वे अदालत से बाहर चले गये, किन्तु उन्होंने पगड़ी नही उतारी

दूसरी घटना भी दक्षिण अफ्रीका की है। Mahatma Gandhi डर्बन से रेल के द्वारा प्रिटोरिया जा रहे थे। उनके पास पहले दर्जे का टिकट था। एक गोरा आया और उन्हैं दूसरे ड़िब्बे में जाने के लिए धमकाने लगा।
गाँधी ने कहा – ‘मेरे पास पहले दर्जे का टिकट है। मैं पहले दर्जे में सफर करूँगा।’

अंगे्रजो का राज्य था। उस अंगे्रज ने जिद्द पकड़ ली। गोरे के साथा यह काला कैसे बैठेगा? अंततः, उसने Mahatma Gandhi का सारा सामान स्टेशन पर फेंकवा दिया। ठंड का मौसम था। फिर गाँधीजी रात भर प्लेटफार्म पर डटे रहे। वे टस-से-मस नहीं हुए। वे वहाँ से तभी हटे, जब पहले दर्जे में उनके  जाने की  व्यवस्था की गयी।

गाँधीजी की निर्भीकता को देखकर गोरे अफासर दंग रह गये।

आगे चलकर Mahatma Gandhi ने पूरे स्वाधीनता-संग्राम में अपनी निर्भीकता का परिचय दिया। उनकी निर्भीकता का ही फल था कि हमें स्वतंत्रता मिली।

Mahatma Gandhi की निर्भीकता की Story. कभी कभी आपके Life एसा Time आ सकता है, जब आपको असत्य के मार्ग पर चलने के लिए Force किया जायेगा।

Moral: याद रक्खें आपको डराया  जायेगा। आपको सत्य के मार्ग से विचलित करने की कोशिश का जायेगी। तुम्हारे अधिकारी से आपको वंचित किया जायेगा। अपने अधिकारी की माँग करने पर आपको दंडित किया जायेगा। संसार में दुष्टो की कमी नही है। दुष्ट अपनी दुष्टता करते रहते है। कभी तुम भी उनकी दुष्टता के शिकार हो सकते है।तुम अपनी जगह पर गलत नही होगे,लेकिन तुमहे गलत सिद्व करने की भरपुर कोशिस की जायेगी। ऐसी परिस्तिथति में तुम क्या करोगे? क्या तुम सत्य को जानते हुए भी असत्य को स्वीकार कर लोगे? क्या तुम न्याय को पहचानते हुए भी अन्याय का साथ दोगे? क्या तुम विववश होकर सब कुछ चुपचाप सह लोगे?

इन सारे प्रशनो का एक ही उत्तर है- नही। इससे विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है। इनसे निपटना होगा। पर इसके लिए तुममें अनेक गुणों का होना आवश्यक है; इनमें निर्भीकता का गुण सबसे ज्यादा जरूरी है। निर्भीकता के बिना सब निरर्थक है। तुम निर्भीक होकर ही असत्य का सामना कर सकते हो। निर्भीकता से असत्य का सामना करते समय आपको अनेक कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। लेकिन सत्य की सदा जीत होती है। तुम्हारी निर्भीकता के कारण असत्य का अंधेरा दूर होगा और सत्य का प्रकाश फैलेगा, दुष्ट पराजित होंगे। हर स्थिति में आपको सत्य की रक्ष के लिए निर्भीक होकर अपने स्थान पर हिमालय की तरह अडिग रहना होगा।

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Absarul Haque

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