Mother

माँ के आठ झूट Mother Day Special

मेरी माँ हमेशा सच बोलती हो, ऐसा भी नहीं,
आठ बार तो उसने मुझसे जरूर झूठ बोला,

माँ के आठ झूट Mother Day Special

Mother Day Special Dr Moustapha Akkad के Arabic Poem का अनुवाद

1: यह क़िस्सा मरी जन्म से शुरू होता है,
में एकलौता बेटा था और गरीबी बहुत थी,
इतना खाना नहीं होता था कि हम सब को पर्याप्त होता,
एक दिन हमारे घर कहीं से चावल आए,
मैं बड़े शौक से खाने लगा और वह खिलाने लगी
मैंने देखा कि उसने अपनी प्लेट के चावल भी मेरी थाली में डाल दिए,
“बेटा! यह चावल तुम खा लो मुझे भूख ही नहीं है”।
यह उसका पहला झूठ था।

2: और जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ तो एक दिन मछली पकड़ने गया,
उस छोटी नहर से जो हमारे शहर से गुजरती थी,
ऐसा हुआ कि दो मछलयाँ मेरे हाथ लगीं,
भागा भागा घर आया और जब भोजन तैयार हो गया,
दोनों मछलियों सामने थीं और मैं शौक से खा रहा था,
देखा कि माँ केवल कांटों को चूस रही थी,
मैं जब यह देख कर मैं ने खाने से हाथ खींच लिया तो कहने लगी,
“तुम्हें तो पता ही है कि मुझे मछली का मांस पसंद इसीलिए तुम तो खाओ”।
और यह उसका दूसरा झूठ था।

3: और फिर मेरे पिता का देहांत हो गया और वह विधवा हो गई,
और हम दोनों घर में अकेले रह गए,
कुछ दिन मेरे चाचा जो बहुत अच्छे आदमी थे,
हमें खाना और आवश्यकताओं का सामान लाकर देते रहे,
हमारे पड़ोसी उसे आते जाते गौर से देखने लगे,
एक दिन उन्होंने मां से कहा;
“जीवन हमेशा इस रूप में बिताई नहीं जा सकती,
बेहतर है कि तुम इस आदमी से शादी कर लो “।
लेकिन मेरी माँ ने चाचा को ही आने-जाने से मना कर दिया,
“मुझे किसी साथी और किसी के प्यार की कोई जरूरत नहीं है”।
यह उसका तीसरा झूठ था।

4: और जब मं कुछ और बड़ा हुआ और बड़े School में जाने लगा,
तो मेरी माँ घर में हर समय कपड़े सीने लगी,
और यह कपड़े वह घर घर जाकर बेचती थी,
सर्दियों की रात थी और माँ अभी तक घर वापस नहीं आई थी,
में तंग आकर उसे ढूंढने निकल पड़ा,
मैं ने उसे कपड़ों का एक गठरी उठाए देखा,
गलियों में घर घर दरवाज़े खटखटा रही थी,
मैंने कहा, “माँ चलो अब घर चलो, बाकी काम कल कर लेना”।
कहने लगी, “तुम तो घर जाओ,

मैं ने कहा… देखो कितनी ठंड है और बारिश भी हो रही है,

तो उसका उत्तर था: यह दो जोड़ी बेचकर ही आऊँगी,

और चिंता मत करो मैं ठीक हूँ और थकान भी नहीं है “।

यह उसका चौथा झूठ था।

5: और फिर मेरा School में अंतिम दिन भी आ गया,
अंतिम Exam था,
माँ मेरे साथ School गई,
मैं अंदर Exam hall में था और वह बाहर धूप में खड़ी थी।
बहुत देर बाद में बाहर निकला, मैं बहुत खुश था।
माँ ने वहीं से एक पेय की बोतल खरीदी और मैं गटा गट पी गया।
मैं शुक्रगुजार दृष्टि से उसे देखा।
उसके माथे पर पसीने की धारीं चल रही थीं,
मैं ने बोतल उसकी ओर बढ़ा दी,
“पियो नां माँ”।
लेकिन उसने कहा;
“तुम पियो, मुझे तो बिल्कुल प्यास नहीं है”।
यह उसका पांचवां झूठ था।

6: और जब पढ़ाई समाप्त हो गईं और मुझे एक job मिल गई,
तो मैंने सोचा कि अब यह उचित समय है कि माँ को कुछ आराम दिया जाए,
अब उसकी स्वास्थ्य पहले जैसी नहीं थी,
इसीलिए वे घर घर फिरकर कपड़े नहीं बेचती थी,
बल्कि बाजार में ही जमीन पर दरी बिछा कर कुछ सब्जियों आदि बेच आती थी।
जब मैंने अपने Salary में से कुछ हिस्सा उसे देना चाहा,
तो उसने सहजता से मुझे मना कर दिया।
“बेटा! अभी तुम्हारी Salary थोड़ी है,
उसे अपने पास ही रखो इकट्ठा करो, मेरा तो गज़ारह चल ही रहा है,
इतना कमा लेती हूँ जो मुझे काफी हो “।
और यह उसका छठा झूठ था।

7: और जब मैं काम के साथ साथ अधिक पढ़ने लगा और डिग्री लेने लगा,
तो मेरे Promotion भी हो गया,
जिस German company में था, उन्होंने मुझे अपने Head office में Germany बुला लिया,
और मेरी एक नए जीवन की शुरुआत हुई,
मैं माँ को Phone किया और उसे वहाँ मेरे पास आने को कहा,
लेकिन उसे यह पसंद नहीं आया कि मुझ पर बोझ बने,
कहने लगी कि, “तुम्हें तो पता है कि मैं इस जीवन शैली के आदी नहीं हूँ,
मैं यहाँ पर ही खुश हूँ।
और यह सातवां झूठ था।

8: और फिर वह बहुत बूढ़ी हो गई।
एक दिन मुझे पता चला कि उसे जानलेवा कैंसर हो गया है,
मुझे उसके पास होना चाहिए था, लेकिन हमारे दरमयाँ दूरियां थीं,
फिर जब उसे Hospital पहुंचा दिया गया तो मुझसे रहा न गया,
मैं सब कुछ छोड़ छाड़ कर उसके पास स्वदेश लौट गया,
वह Bed पर थी, मुझे देख कर उसके होठों पर एक मुस्कान आ गई,
मुझे यह देखकर एक धक्का सा लगा और दिल जलने लगा,
बहुत कमजोर बहुत बीमार लग रही थी,
यह वह नहीं थी, जिसे मैं जानता था,
मेरी आँखों से आँसू जारी हो गए,
लेकिन माँ ने मुझे ठीक से रोने भी नहीं दिया,
मेरी खातिर फिर मुस्कुराने लगी,
“न रो मेरे बेटे, मुझे बिल्कुल भी दर्द नहीं महसूस हो रहा”।
और यह उसका आठवां झूठ था।

इसके बाद उसने आंखें मूंद लीं
इसके बाद आंखें कभी नखोलीं

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Mother Day Special पर यदि आप के पास कुछ हो तो हमें भेजें हम उसे यहाँ आपके नाम यूआरएल के साथ पोस्ट करेंगे. धन्यवाद

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About the author

Absarul Haque

एक ब्लॉगर जो अपनी बातों को अच्छी बातों में बदलना चाहता है. और आपके सहयोग के बिना ये नामुमकिन है.

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2 Comments

  • माँ सबसे प्यारी, खुद तकलीफ लेके हमें सुख देती हैं.

  • माँ तो बस माँ होती हैं, अपने बच्चों का मन और उसकी तकलीफ बस वो ही समझ सकती हैं.