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Sant Kabir Quotes in Hindi, कबीरदास Thoughts

Sant Kabir Quotes in Hindi कबीरदास अपनें दोहों को वजह से बहुत मशहूर हैं आज मैं उनकी कुछ Inspirational Quotes आप लोगों के समकक्ष रख रहा हूँ। Sant Kabir Quotes.
Sant Kabir Quotes in Hindi

हिंदी में Sant Kabir Quotes

Quote 1: मन को ही अपना शिष्य-सेवक बनाओ और इसे ही ज्ञान उपदेश दो अर्थात अन्य जनों को छोड़कर सर्व प्रथम अपने मन को ज्ञान- विचार से दीक्षित कर पवित्र बनाओ। इस प्रकार जो मन को अपने वश में कर लेता है, सारा संसार ही उसका शिष्य हो जाता है।
 By Sant Kabir / संत कबीर

Quote 2: इस मन का क्या करू! इसे पटक पटक कर ऐसा मरुँ की यह टुकड़े टुकड़े हो जाये। इसने जो दुष्कर्म विषय रूपी विष की क्यारी (खेत) बोई थी, उसका फल भोगने में अब क्यूँ पश्चाताप करता है (जैसी करनी, वैसी भरनी)

 By Sant Kabir / संत कबीर

Quote 3: यह संसार मन का दास है अर्थात जैसा मन चाहता है, यहाँ के लोग वैसा ही करते हैं। परन्तु सद्गुरु के दास तो कोई विरले ही साधू- संत होते हैं। जो गुरु के सदुपदेश – ज्ञान प्रवचन को मानता है (गुरु सेवा- भक्ति करता है) उसका मत (सिद्धांत) अथाह गंभीर है।

 By Sant Kabir / संत कबीर

Quote 4: सद्गुरु सच्चे शुर-वीर हैं, उनका कोई शत्रु नहीं है और ना ही वे कहीं युद्ध करने जाते हैं। वे अपनी प्रिय शिष्य की नख से शिखा तक की बुराइयों को दूर करने के लिए, अपने ज्ञान-रूपी शब्द बाण से हिरदय को चूर-चूर (छलनी) कर देते हैं, लेकिन बाहर से उसके घाव दिखाई नहीं पड़ते।

  By Sant Kabir /  संत कबीर
Quote 5: जो सद्गुरु की शरण में नहीं आते, उनकी बार-बार हानि ही होती है। बिगड़ी को बानाने वाले अर्थात जीवन के क्लेशों को मिटाने वाले तो सद्गुरु ही हैं। जो उनकी शरण में नहीं आते, वे यूँ ही नष्ट हो जाएंगे, क्यों की तीनों लोकों में काल (मृत्यु) का राज्य है।
  By Sant Kabir / संत कबीर
Quote 6: चंचल मन का कोई भी स्थिर मत नहीं है, अतः इसके मत-पथ पर ना चलो। इसकी जो अज्ञानतापूर्ण बुरी आदातें हैं, उन्हें स्वाध्याय-साधना से छुडाओ। जिस प्रकार सूत कातने वाली सूत को उल्टा लाकर बार-बार चरखे की पियुनी पर लपेटती रहती है, उसी प्रकार दौड़ते हुए मन को दुष्कामनाओं से बचा कर बार-बार भाक्ति साधना में लागाओ।
  By Sant Kabir / संत कबीर

Quote 7: जीवन में यह मन इतना महत्वपूर्ण तथा प्रभावशाली है की मन के कठोर ताप से ही लोग गोरखनाथ जैसे योगी बन जाते हैं। जो अपने मन को वश में कर के स्वाध्याय-साधना के यत्न में रखता है, वह स्वंय ही अपना कर्ता (स्वामी) है।

  By Sant Kabir / संत कबीर
Quote 8: माया (धन-सम्पित) रुपि यह पेड़ दो फलो (परम सुख – नरक दुख) को देने वाला है। जो इसे सनतोषपुरवक खाते हैं तथा सेवा-दान, परोपकार आदि पुन्य कर्मों में खर्च भी करते हैं, उन्हें परम सुख मिलता है। लेकिन जो लोग लोभवश इसका सग्रह करते हैं, उन्हें महान दुःख रूपी नरक द्वार में गिरना पड़ता है।
  By Sant Kabir / संत कबीर
Quote 9: पहले भी बहुत कुछ कह दिया है, फिर कहता हूँ और कहते हुए जाता हूँ, फर भी नासमझ लोग मेरी बात को नहीं मानते। चाहे कोई साधू-वैरागी के वेश में हो या गृहस्थ में, किसी भी रूप में कामी मनुष्य का कहीं ठिकाना नहीं है अर्थात उसका उद्धार (भला) नहीं हो सकता।
  By Sant Kabir / संत कबीर
Quote 10: जो भी सत्कर्म तुझे कल करने हैं, उन्हें आज ही कर ले। क्यों की उत्तम मानव-तन और सभी कल्याण-साधन तेरे साथ हैं। कल-कल का तू काया मिथ्या बहाना करता है। कल तो काल के हाथों में है, ना जाने कल क्या हो जाए।
  By Sant Kabir / संत कबीर

Quote 11: मनुष्य का यह तन घर के समान है और इस घर का रक्षक सत्संग-ज्ञान-उपदेश सुनने में बहरा है। इसके जीवन रूपी खेत को काम-विषयादी रूपी चिडयों ने नोच खाया। अब आधा-चौथाई जो भी शेष बचा है, बचालो और सावधान हो जाओ।

 By Sant Kabir / संत कबीर
Sant Kabir Quotes कैसा लगा Comment में ज़रूर बतलाएं धन्यवाद।
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About the author

Absarul Haque

एक ब्लॉगर जो अपनी बातों को अच्छी बातों में बदलना चाहता है. और आपके सहयोग के बिना ये नामुमकिन है.

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1 Comment

  • संत कबीर दास जी के quotes का संग्रह बहुत बढ़िया लगा उनके दोहे जीवन का सच बया करने वाले होते हैं.