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दो कहानिया Personal Development के लिए

आपके अनेक Friends होंगे। अच्छे या बुरे मित्र की पहचान आप कैसे करते हैं? किसी Friend के बारे में आप अपनी राय कैसे बनाते है? यह बहुत ही मीत्त्वपूर्ण बात हैं। जिसे आप अच्छा दोस्त मानते हैं, उसके बारे में आपकी धारणा का कोई कारण तो होगा? ऐसा तो नहीं, उसने आपको दो-चार दिन चाट-पकौड़े खिलाए, लम्बी-लम्बी गप्पें हाँकी और उसे झटपट अपना मित्र मान बैठे? इसी तरह, जिसे आप अपना अच्छा नही मानते है, इसका भी कोई कारण तो होगा ही? पर कई बार भ्रम के कारण भी किसी के प्रति अच्छी या बुरी धारणा बन जाती है, जो गलत होती है। आज मैं इस पर दो कहानियाँ लिख रहा हूँ।

दो कहानिया Personal Development के लिए

पहली कहानी

एक बार की बात है। पाठशाला के बच्चे पिकनिक (वन-विहार) पर गये हुए थे। कुछ बच्चे खेल रहे थे। कुछ जंगल में यूँही इधर-उधर घुम रहे थे। विमल भी घूम रहा था। अचानक उसने चीख सुनी। कोई चिल्ला रहा था – ‘बचाओ…..बचाओ…….।’
विमल अवाज के ओर दौड़ गया। उसने देखा पिकनिक में आये उसके साथीयों में से एक, नलीन जंगल की घाटी के कगार से नीचे गिर गया था और एक छोटे से पेड़ की डाली पकड़े लटका था। नीचे घाटी में एक गहरी नदी बी रही थी। विमल ने इधर-उधर देखा। आसपास कोई नहीं था, जिसे वह Help के लिए बुलाता। उसने झटपट अपना बेल्ट निकाला और उसका एक छोर नलिन की ओर बढ़ा दिया।
विमल ने कहा – नलिन, इसे किसी तरह पकड़ो।
नलिन एक हाथ से पेड़ की डाल को पकड़े रहा और दूसरे हाथ से उसने बेल्ट को थाम लिया। बेल्ट को थामते ही पेड़ उखड़ गया। अब वह पूरी बेल्ट के साहारे लटका था।
विमल ने काफी जोर लगाया और नलिन को उपर के ओर खींच लिया। अपनी सूझबूझ और साहस से उसने नलिन की जान बचा ली।
नलिन विमल के गले से लिपट गया। वह फूट-फूट कर रोने लगा और बोला- मुझे माफ कर दो विमल। मैं तुम को अच्छा नही मानता था, इस लिए मैं पिकनिक आाते समय मैं यह चाह रहा था कि तुम मत आओ। यदि आज तुम नीं होते तो, मेरी जान चली जाती।
विमल ने कहा- रोओ मत मेरे दोस्त! पर यह तो बताओ कि मैंने ऐसा क्या किया था, जिससे मेरे प्रति तुम्हारी राय खराब हो गयी?
नलिन ने बताया- मैने एक दिन तुम्हारी पास पाँच रुपये देखे थे। मुझे पैसे की जरूरत थी। मैंने तुमसे दो रुपये उधार माँगे थे, लेकिन तुमने नहीं दीये थे।
विमल ने कहा- वे रुपये मुझे मेरी माँ ने दिये थे। माँ बिमार थी। उसके लिए दवा खरीदनी थी, फिर कैसे देता?
यह सुनकर नलिन को अपनी गलती पर पश्चात्ताप हुआ। वह व्यर्थ ही विमल को खराब समझ बैठा था। उसने कहा- मुझे माफ कर दो विमल! मैं समझ गया हूँ कि किसी के प्रति जल्दी में कोई राय नहीं बननी चाहिए।
नलिन की गलतफहमी दूर हो गयी थी। अब वह विमल को अच्छा मानने लगा था। धारणा के संबंध में हाथी और सात अंधों की एक प्रसिद्ध कथा भी है।

दूसरी कहानी

एक गाँव था। उस गाँव में सात अंधे थे। एक दिन उस गाँव में एक हाथी आया। सभी अंधे हाथी को टटोलकर यह अनुमान करने लगे कि हाथी कैसा होता है? एक अंधे ने हाथी की पूँछ पकड़ ली। उसने उसे टटोला। कुछ सोचा-समझा और बोला- हाथी साँप के समान है।
छूसरे ने हाथी का पैर पकड़े लिया था। उसने टटोलकर अनुमान लगाया और कहा- हाथी थम्भ के जैसे है।
हाथी के कान को पकडे़ हुए तीसरे अंधे ने कहा- हाथी सूप के समान है।
चैथे ने हाथी की सूँड़ पकड़ रखी थी। उसने बताया- हाथी केले की पेड़ के जैसा है।
पाँचवाँ ने हाथी के पेट पर हाथ रखे हुए था। उसने कहा- हाथी दिवल की तरह है।
छठा सबकी बात सुनकर आश्चर्यचकिता था। वह हाथी के दाँत को पकड़े हुए था। उसने कहा-तुम सब पागल हो। हाथी पत्थर के एक बड़े टुकड़े के जैसा है।
पर प्रत्येक अंधे ने जो कहा, क्या हाथी वैसा ही है?
हाथी वैसा नहीं है, जैसा प्रत्येक अंधे ने कहा। सबों ने केवल हाथी के एक-एक अंग को पकड़कर ही उसके बारे में अपनी राय बना ली। ठीक इसी प्रकार किसी की एक-दो बातों को देखकर उसके बारे में अपनी कोई राय बना लेना ठीक नही है। किसी को सम्पूर्ण रूप से समझकर ही उसके अच्छे या खराब होने की राय बननी चाहिए, अन्यथा नहीं।

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Absarul Haque

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